जल संसाधन Geography Class 10th Chapter 01 (ख) Metric Exam 2027

(ख) जल संसाधन

❖ जल स्रोत विविध रूपों में पाए जाते हैं:-

  • भू- पृष्ठीय जल
  • भूमिगत जल
  • वायुमंडलीय जल
  • महासागरीय जल

नोट:- हमारे जीवन में भू-पृष्ठीय और भूमिगत जल का प्रत्यक्षतः उपयोग होता है |

❖ भू पृष्ठीय जल:-

  • भू पृष्ठ पर पाए जाने वाले जल को भू- पृष्ठ जल या धरातलीय जल कहते है |
  • भू पृष्ठीय जल का मूल स्रोत वर्षन है |
  • भू – पृष्ठीय जल -नदी -नाले, झील-तालाबों, सागर एवं महासागर में पाया जाता है |

❖ भूमिगत जल:-

  • वर्षा जल की धरातलीय छिद्रों से रिस रि स कर कठोर आवरण पर जमा जल भूमिगत जल कहलाता है |
  • इसे भौमजल के नाम से भी जाना जाता है |

❖ महत्वपूर्ण तथ्य:-

  • पृथ्वी की सतह का तीन चौथाई भाग जल से ढका है |
  • जल नवीकरणीय संसाधन है |
  • पृथ्वी के अधिकतर भू भाग पर जल की उपस्थिति के कारण पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है |
  • विश्व के कुल जल 96.5% जल महासागर में पाया जाता है |
  • महासागरीय जल लवनीय होता है |
  • विश्व के कुल जल का 2.5% जल अलवणीय होता है |
  • महासागर सबसे बड़े जल संग्रह केंद्र होते हैं | इसी कारण महासागर को जलधि की संज्ञा दी जाती है |
  • विश्व का अधिकांश जल दक्षिण गोलार्ध में है | इसकी दक्षिणी गोलार्ध को जल गोलार्ध कहा जाता है |
  • विश्व का अधिकांश स्थल उत्तरी गोलार्ध में है इसी कारण उत्तरी गोलार्ध को स्थल गोलार्ध कहा जाता है |
  • विश्व के मृदु जल का 75% जल चादर या हिमनद के रूप में पाई जाती है और 25% भूमिगत जल स्वच्छ जल के रूप में पाई जाती है |
  • प्राणियों में 65% तथा पौधों में 65-99% जल का अंश विद्यमान रहता है |

जल संसाधन Geography Class 10th Chapter 01 (ख) Metric Exam 2027

❖ जल के विविध उपयोग:-

  • पेयजल
  • घरेलू कार्य
  • सिंचाई
  • उद्योग
  • स्वच्छता
  • मूल मूत्र विसर्जन
  • जन स्वास्थ्य
  • जल विद्युत निर्माण
  • परमाणु संयंत्र शीतलन
  • जल कृषि
  • जल क्रीड़ा
  • वानिकी

❖ जल संसाधन का वितरण एवं उपयोग:-

  • भारत में विश्व के लगभग 16% आबादी निवास करती है और भारत में विश्व का लगभग 4% स्वच्छ जल उपलब्ध है |
  • भारत में प्रति वर्ष 4000 घन किलोमीटर जल वर्षा से तथा 1869 घन किलोमीटर जल भू पृष्ठीयजल से प्राप्ति होती है |
  • कुल पृष्ठीय जल का लगभग 2/3 भाग देश की तीन बड़ी नदियों सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र में प्रवाहित होती है |
  • भारत में जलाशयों का जल भंडारण क्षमता लगभग 174 अरब घन मीटर हो गई है | जो देश की स्वतंत्रता के समय 18 अरब घन मीटर थी |
  • भारत में केवल 690 अरब घनमीटर जल का ही उपयोग कर पाता है जो कुल जल का 32% है |
  • भारत के उत्तरी मैदान में पंजाब से लेकर ब्रह्मपुत्र घाटी तक सर्वाधिक भूमिगत जल पाए जाते हैं | (लगभग 42%)
  •   भारत में 443.9 अरब घन मीटर भूमिगत जल उपलब्ध है जिसका 19% जल उत्तर प्रदेश में है |
  • ब्रह्मपुत्र नदी का विश्व की बड़ी नदियों में आठवां स्थान है |
  • गंगा नदी का विश्व की बड़ी नदियों में दसवां स्थान है |
  • भारत में गंगा द्रोणी में उपयोग के योग्य जल भंडारण की क्षमता सर्वाधिक हैं |
  • ब्रह्मपुत्र नदी का सर्वाधिक वार्षिक प्रवाह होता है लेकिन उपयोग योग्य जल कम है |
  • उपयोग जल भंडारण क्षमता के आनुपातिक की दृष्टि से ताप्ती नदी प्रथम स्थान है |
  • भारत में 1951 में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 5177 घन मीटर थी जो 2001 में 1829 घन मीटर हो गई |
  • 2025 तक प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1342 घन मीटर हो जाएगी |

❖ बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं:- वैसे नदी घाटी परियोजनाएं जिसका कई उद्देश्य होता है उसे बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं कहते हैं |

जल संसाधन Geography Class 10th

❖ बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं के उद्देश्य:-

  • बाढ़ नियंत्रण
  • मृदा अपरदन पर रोक
  • पेय एवं सिंचाई हेतु जल
  • विद्युत उत्पादन
  • उद्योग के जलापूर्ति
  • पर्यटन
  • परिवहन
  • मनोरंजन
  • वन्य जीवन संरक्षण
  • मत्स्य पालन
  • जल कृषि

❖ प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं है:–

  • भांगड़ा नागल परियोजना
  • हीराकुंड परियोजना
  • दामोदर परियोजना
  • गोदावरी परियोजना
  • स्वर्ण रेखा परियोजना
  • सोन परियोजना

नोट:- बहुउद्देशीय परियोजना को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत का मन्दिर कहा है |

❖ नर्मदा बचाओ आंदोलन:- नर्मदा बचाओ आंदोलन एक गैर सरकारी संगठन है स्थानीय लोगों, किसान, पर्यावरणविदों, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को गुजरात के नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के विरोध के लिए प्रेरित करता है | नर्मदा बचाओ आंदोलन मेघा पाटेकर के द्वारा चलाया गया था |

❖ जल संकट:-

  • जल की अनुपलब्धता को जल संकट कहते हैं |
  • स्वीडन के एक विशेषज्ञ के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 1000 घनमीटर जल की आवश्यकता है | इससे कम जल की अनुपलब्धता जल संकट है |
  • जल संकट के कारण सूखाग्रस्त की स्थिति उत्पन्न होती है |
  • जल की कमी के इसके अतिशोषण, अति उपयोग एवं समाज के विभिन्न वर्गों में जल के असमान वितरण से उत्पन्न होती है |
  • बिहार एवं पश्चिम बंगाल के कुछ भागों में जल के अति दोहन से संख्या एवं राजस्थान एवं महाराष्ट्र में फ्लोराइड के संकेंद्रण में वृद्धि हुई है |
  • जल संसाधन

❖ जल संरक्षण एवं प्रबंधन आवश्यकताएं क्यों है ? जल संसाधन के सीमित आपूर्ति, तेजी से फैलते प्रदूषण एवं समय की मांग को देखते हुए जल संसाधन का संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता है।

❖ राष्ट्रीय जल नीति:-

  • जल संकट के निवारण हेतु सितंबर 1987 में राष्ट्रीय जलनीति स्वीकृत किया गया।
  • राष्ट्रीय जल नीति 1987 को संशोधित राष्ट्रीय जल नीति 2002 में प्रस्तुत किया गया। इसके अंतर्गत निम्न सिद्धांतों को ध्यान में रखकर योजना निर्मित किया गया:
    • जल की उपलब्धता बनाए रखना
    • जल को प्रदूषित होने से बचाना
    • प्रदूषित जल की स्वस्थ रख उसका पुनचक्रन करना

❖ जल संरक्षण की विधियां:-

  • भूमिगत जल की पूर्ति
  • जल संभर प्रबंधन
  • तकनीकी विकास

❖ वर्षा जल संग्रहण:-

  • वर्षा के जल को जमा करना वर्षा जल संग्रहण कहलाता है।
  • भूमिगत जल का 22% भाग का संचय वर्षा जल का भूमि में प्रवेश करने से होता है।
  • मेघालय स्थित चेरापूंजी एवं मसिनराम में विश्व की सर्वाधिक वर्षा होती है।
  • राजस्थान में वर्षा जल को एकत्रित करने के लिए गड्ढे का निर्माण किया जाता है। जिसे जैसलमेर में खादीन तथा अन्य क्षेत्रों में जोहड़ कहा जाता है।
  • राजस्थान के बिसनो फलोदी और बाड़मेर जैसे शुष्क क्षेत्रों में पेयजल का संचय भूमिगत टैंक में किया जाता है। जिसे टांका कहा जाता है।
  • राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण का कार्य तरुण भारत संघ नामक एनजीओ कर रही है।
  • राजस्थान और मेघालय में वर्षा जल का संग्रहण छत पर किया जाता है।

➢ बिहार में तीन प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं :- i. सोन परियोजना ii. गंडक परियोजना iii. कोसी परियोजना

जल संसाधन Geography Class 10th Chapter 01 (ख)

❖ सोन परियोजना:-

  • सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पहली परियोजना है।
  • ब्रिटिश सरकार ने सोन परियोजना का विकास 1874 ईस्वी में किया था।
  • सोन परियोजना से डेहरी के समीप पूरब एवं पश्चिम दिशाओं में नहरें निकली गयी है जिसकी कुल लम्बाई 130 कि०मी० है।
  • पूरब की नहर से पटना, गया तथा औरंगाबाद जिले में सिंचाई होती है।
  • पश्चिम की नहर से रोहतास, बक्सर एवं भोजपुर जिले की सिंचाई होती है।
  • इस नहर के पूर्वी शाखा पर बारुण नामक स्थान पर शक्ति गृह लगायें गए हैं।
  • इस नहर के पश्चिमी शाखा पर डेहरी के समीप शक्ति गृह की स्थापना की गयी है।
  • 1968 में डेहरी से 10 कि०मी० की दूरी पर इन्द्रपुरी नामक स्थान पर बाँध लगाकर बहुउद्देशीय परियोजना का रूप देने का प्रयास किया गया।
  • सोन परियोजना के कारण सोन का सूखाग्रस्त प्रदेश आज बिहार का चावल कटोरा के नाम से विभूषित हो रहा है।
  • Note:- बिहार विभाजन के पूर्व इन्द्रपुरी जलाशय योजना को कदवन जलाशय योजना के नाम से जानी जाती थी।

बिहार की प्रस्तावित परियोजनाएं :-

  • दुर्गावती जलाशय परियोजना
  • उपरी किऊल जलाशय परियोजना
  • बागमती परियोजना
  • बरनाल जलाशय परियोजना

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. भूमिगत जल स्तर की गिरावट रोकने के लिए कौन योजना चलाई गई है?

उत्तर- इनमें से सभी

  • दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना कौन-सी है?

उत्तर- तुंगभद्रा

  • सबसे अधिक वर्षा काह होती हैं?

उत्तर- मौसिनराम

  • शरावती नदीघाटी परियोजना कहाँ अवस्थित है?

उत्तर- कर्नाटक

जल संसाधन

  • प्रथम राष्ट्रीय जल नीति कब अपनाई गई थी?

उत्तर- 1987

  • इंदिरा गाँधी नहर किस राज्य में स्थित है?

उत्तर- राजस्थान

  • दामोदर घाटी परियोजना किस राज्य में स्थित है?

उत्तर- झारखंड

जल संसाधन

  • भाखड़ा-नंगल परियोजना किस नदी पर बनी है?

उत्तर- सतलज

  • भारत का सबसे लंबा बाँध कौन-सा है?

उत्तर- हीराकुंड बाँध

जल संसाधन

  1. नर्मदा घाटी परियोजना किन राज्यों से संबंधित है?

उत्तर- गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश

  1. प्रथम राष्ट्रीय जल नीति कब लागू हुई?

उत्तर- सितम्बर, 1987

  1. कृष्णराज सागर बाँध किस नदी पर बना है?

उत्तर- कावेरी

जल संसाधन

  1. गोविंद सागर कृत्रिम जलाशय संबंधित है।

उत्तर- भाखड़ा नांगल बाँध से

  1. वृहद क्षेत्र में जल की उपस्थिति के कारण ही पृथ्वी को कहते हैं

उत्तर- नीला ग्रह

  1. देश में सर्वाधिक वर्षा कहाँ होती है?

उत्तर- मासिनराम

  1. प्राणियों के शरीर में कितनी प्रतिशत जल की मात्रा निहित होती है?

उत्तर- 65%

  1. देश के बाँधों को किसने ‘भारत का मंदिर’ कहा था?

उत्तर- पंडित नेहरू

  1. हीराकुंड परियोजना किस नदी पर है?

उत्तर- महानदी

  1. भारत में सबसे बड़ा मानव निर्मित जलाशय है

उत्तर- गोविंद वल्लभ पंत सागर

  • बिहार में अति जल दोहन से किस तत्त्व का संकेंद्रण बढ़ा है?

उत्तर- आर्सेनिक

जल संसाधन

  • जल किस प्रकार का संसाधन है?

उत्तर- चक्रीय

  • पृथ्वी के किस गोलार्द्ध को जल गोलार्द्ध कहा जाता है?

उत्तर- दक्षिणी गोलार्द्ध को

  • विश्व के कुल जल आयतन का कितना प्रतिशत मृदु जल है?

उत्तर- 2.5%

  • निम्न में राजस्थान की सबसे महत्त्वपूर्ण योजना कौन-सी है?

उत्तर- इंदिरा गाँधी नहर परियोजना

  • सरदार सरोवर बाँध किस नदी पर बनाया गया है?

उत्तर- नर्मदा

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. बहुउद्देशीय परियोजना से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- वैसा नदी घाटी परियोजना जिसका कई उद्देश्य होता है उसे बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना कहा जाता है। बहुउद्देशीय परियोजना का उद्देश्य- बाढ़ नियंत्रण, मृदा अपरदन पर रोक, विद्युत उत्पादन, परिवहन, मनोरंजन, मत्स्य पालन, जल कृषि, पर्यटन इत्यादि है।

2. जल संसाधन के क्या उपयोग हैं? लिखें। [2017AI,

उत्तर:- जल संसाधन का उपयोग पेयजल, घरेलू कार्य, सिंचाई, उद्योग, जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, मल मूत्र विसर्जन, जल द्युत निर्माण, परमाणु संयंत्र शीतलन, मत्स्य पालन, जल कृषि, वानिकी जल क्रीड़ा जैसे कार्यों में होती है।

3. अंतर्राज्यीय जल विवाद के क्या कारण हैं?

उत्तर:- दो राज्यों के बीच नदी जल के उपयोग के लिए उत्पन्न विवाद ही अंतर्राज्यीय जल-विवाद कहलाता है। देश की अधिकांश नदियां एक से अधिक राज्यों से होकर प्रवाहित होती है। अतः प्रत्येक राज्य अपनी सीमा क्षेत्र के अंतर्गत बहने वाली नदियों के जल का अधिकतम उपयोग करना चाहता है। जल बंटवारे को लेकर ही अंतर्राज्यीय जल-विवाद होता है।

4. जल संकट क्या है?

उत्तर:- जल की अनुपलब्धता जल संकट कहलाता है। स्वीडन के एक विशेषज्ञ फाल्कन मार्क के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 1000 घन मीटर जल की आवश्यकता है। इससे कम जल उपलब्धता जल संकट है।

5. भारत की नदियों के प्रदूषण के कारण का वर्णन कीजिए।

उत्तर:- भारत की नदियों के प्रदूषण के निम्नलिखित कारण है:-

(i) नगरों के कूड़ा-करकट, मल नदियों में गिराया जाना।

(ii) कल-कारखानों के अपशिष्ट रासायनिक पदार्थों को नदी में गिराना।

(iii) मृत जीव-जंतुओं की नदियों में फेंकना।

(iv) तालाबों में कीटनाशक दवाएँ छिड़कना।

6. मृदु जल क्या होता है? जल संसाधन

उत्तर:- पीने योग्य मीठा जल को मृदु जल कहा जाता है। मृदु जल में लवण नहीं होता है।

7. नदी घाटी परियोजना के मुख्य उद्देश्य क्या है? [2015C]

उत्तर:- बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं के उद्देश्य:-

  • बाढ़ नियंत्रण
  • मृदा अपरदन पर रोक
  • पेय एवं सिंचाई हेतु जल
  • विद्युत उत्पादन
  • उद्योग के जलापूर्ति
  • परिवहन
  • वन्य जीवन संरक्षण
  • पर्यटन

8. नदी घाटी परियोजना के किन्ही दो लाभों का उल्लेख कीजिए। [2021AII]

उत्तर:- नदी घाटी परियोजना के लाभ:-

(i) नदी पर बाँध बनाकर बाढ़ को रोका जाता हैं।

(ii) नदी पर बाँध बनाकर सिंचाई की जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:-

1. जल संरक्षण से आप क्या समझते हैं? इसके क्या उपाय हैं?

उत्तर:- जल की उपलब्धता को बनाये रखना, जल को प्रदूषित होने से बचाना तथा प्रदूषण जल को स्वच्छ कर उसका पुनर्चक्रण जल संरक्षण कहलाता है। जल संरक्षण के उपाय निम्न हैं :-

(i) भूमिगत जल की पुनर्पूर्ति- भूमिगत जल एक बहुत ही महत्वपूर्ण जल स्रोत है। आज इसका कई प्रकार से दोहन भी हो रहा है जिससे भूमिगत जल के स्तर में लगातार गिरावट हो रही है। अतः इसकी पुनर्पूर्ति आवश्यक है। इसके लिए वृक्षारोपण, जैविक तथा कम्पोस्ट खाद का उपयोग, वेटलैंड्स का संरक्षण, वर्षा जल का संचयन एवं मल-जल शोधन पुनः चक्रण जैसे क्रियाकलाप उपयोगी होते हैं।

जल संसाधन

(ii) जल संभर प्रबंधन – जल प्रवाह या जल जमाव का उपयोग कर उद्यान, कृषि वानिकी, जल कृषि, कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इससे पेयजल की आपूर्ति भी की जा सकती है। इस प्रबंधन को छोटी इकाइयों पर लागू करने की आवश्यकता है। इसके लिए जलाशयों, नहरों इत्यादि का निर्माण करना चाहिए।

(iii) तकनीकी विकास- तकनीकी विकास से तात्पर्य ऐसे उपक्रम से है जिसमें जल का कम-से-कम उपयोग कर, अधिकाधिक लाभ लिया जा सके। जैसे ड्रिप सिंचाई, लिफ्ट सिंचाई, सूक्ष्म फुहारों से सिंचाई, सीढ़ीनुमा खेती इत्यादि।

2. वर्षा जल की मानव जीवन में क्या भूमिका है ? इसके संग्रहण और पुनः चक्रण के विधियों का उल्लेख करें ।

अथवा, वर्षा जल संग्रहण और पुनः चक्रण के विधियों का उल्लेख करें । [2024AII]

उत्तर :- हमारे लिए उपयोगी जल की एक बड़ी मात्रा वर्षा जल द्वारा ही पूरी होती है। खासकर हमारे देश की कृषि वर्षाजल पर ही आधारित होती है। पश्चिम भारत खासकर राजस्थान में पेयजल हेतु वर्षाजल का संग्रहण छत पर किया जाता था।

शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल को एकत्रित करने के लिए गड्ढों का निर्माण किया जाता था जिससे मृदा सिंचित कर खेती की जा सके। इसे राजस्थान के जैसलमेर में ‘खादीन’ तथा अन्य क्षेत्रों में जोहड़’ के नाम से पुकारा जाता है।

जल संसाधन

राजस्थान के वीरानों फलोदी और बाड़मेर जैसे शुष्क क्षेत्रों में पेय-जल का संचय भूमिगत टैंक में किया जाता है जिसे ‘टाँका’ कहा जाता है। यह प्रायः आँगन में हुआ करता है जिसमें छत पर संग्रहित जल को पाइप द्वारा जोड़ दिया जाता है। इस कार्य में राजस्थान की N.G.O. ‘तरुण भारत संघ’ पिछले कई वर्षों से कार्य कर रही है। मेघालय के शिलांग में छत वर्षाजल का संग्रहण आज भी प्रचलित है। कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित गंगथूर गाँव में छत-जल संग्रहण की व्यवस्था 200 घरों में है जो तब संरक्षण की दिशा में एक मिसाल है। वर्तमान समय में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश राजस्थान एवं गुजरात सहित कई राज्यों में वर्षा-जल संरक्षण एवं पुनः चक्रण किया जा रहा है।

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