कृषि Geography Chapter 02 Class 10th Metric Exam 2027 VVI Question

कृषि

भारत में कृषि का महत्व:-

  • भारत में लगभग दो तिहाई लोगों की जीविका कृषि पर आधारित है।
  • भारत के राष्ट्रीय आय में कृषि का 24% योगदान है।
  • भारत की विशाल जनसंख्या के लिए भोजन कृषि से ही प्राप्त होता है।
  • भारत में कृषि जन्य उद्योगों को कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है।
  • भारत में जलवायु, मिट्टी एवं धरातल की विविधता के कारण फसलों की विविधता भी पाई जाती है।

कृषि योग्य भूमि को चार भागों में बांटा गया है :- (i) बोया गया क्षेत्र (ii) चालू परती भूमि (iii) अन्य परती भूमि (iv) कृषि योग्य व्यर्थ भूमि

कृषि उत्पादन बढ़ाने का तरीका :-

  • प्रति हेक्टेयर उपज में वृद्धि
  • शस्य गहनता
  • शस्य गहनता: – एक ही कृषि वर्ष में एक ही भूमि में एक से अधिक फसलों को उगाकर कुल उत्पादन में वृद्धि करना शस्य गहनता कहलाता है।

नोट:- शस्य गहनता की दृष्टि से पंजाब भारत का अग्रणी राज्य है।

शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले कारक :-

  • सिंचाई
  • उर्वरक
  • उन्नत बीज
  • यंत्रीकरण
  • कीटनाशक
  • कृषि उत्पादन का उचित मूल्य
  • निवेश उपयोग:- पूंजी लगाकर सिंचाई, खाद, उन्नत बीज, मशीन आदि का उपयोग करना निवेश उपयोग कहलाता है।
  • वर्षा पोषित कृषि या वर्षाधीन कृषि:- जब फसल केवल वर्षा द्वारा प्राप्त नमी के आधार पर पैदा की जाती है तब इसे वर्षापोषित कृषि या वर्षाधीन कृषि कहते हैं।
  • भारत में 38.67 प्रतिशत भूमि पर वर्षाधीन कृषि होती है।

वर्षा पोषित कृषि दो प्रकार की होती है :- (i) शुष्क भूमि कृषि (ii) आर्द्र भूमि कृषि

(i) शुष्क भूमि कृषि:- 75 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले क्षेत्र में होने वाली कृषि को शुष्क भूमि कृषि कहा जाता है।

(ii) आर्द्र भूमि कृषि :- 75 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में होने वाली कृषि को आर्द्र भूमि कृषि कहा जाता है।

शुष्क भूमि कृषि की विशेषताएं:

  1. वर्षा जल को संरक्षित करने की विधियों का प्रयोग किया जाता है ताकि शुष्क समय में उसका उपयोग किया जा सके।
  2. आवश्यकता से अधिक जल को भूमिगत जल के पुन: भरण के लिये संरक्षित जाता है।
  3. शुष्कता के कारण यहाँ की मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा बहुत कम होती है।
  4. शुष्कता के कारण मिट्टी की ऊपरी परत का वायु द्वारा कटाव होता है।
  5. शुष्क भूमि कृषि अधिकांशतः गरीब किसान करते हैं जिनके पास उन्नत कृषि करने के लिये पूँजी एवम् आवश्यक साधन का अभाव रहता है।
  6. कृषि के द्वारा यहाँ आय कम प्राप्त होती है जिसकी क्षतिपूर्ति पशुपालन द्वारा की जाती है।

गरीब किसानों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम:-

  1. समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम, सूखा प्रवण क्षेत्र विकास कार्यक्रम और रोजगार के बदले अनाज कार्यक्रम, नरेगा आदि।
  2. शीघ्र तैयार होने वाली फसलों का बीज तैयार किया जा रहा है।
  3. कृषि की नई तकनीक का विकास।
  4. जल छीजन एवम् संग्रहण की तकनीकों का प्रचार प्रसार।
  5. पशुपालन एवम् मुर्गीपालन के कृषि के पूरक अंग के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  6. कुटीर उद्योग एवम् लघु उद्योगों को विकसित किया जा रहा है।
  7. अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के लिये अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (हैदराबाद) तथा केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (जोधपुर) शुष्क भूमि एवं अन्य कृषि से संबंधित समस्याओं के निदान के लिये कार्यरत है।

भारत में तीन प्रकार का कृषि होता है :- (i) प्रारंभिक जीविका कृषि (ii) गहन जीविका कृषि (iii) वाणिज्यक कृषि

  • प्रारंभिक जीविका कृषि: – प्रारंभिक जीविका कृषि में परंपरागत तरीका और परंपरागत औजार से कृषि की जाती है। जैसे तैसे बीज बो दिया जाता है और फसल पकने पर काट लिया जाता है। इस कृषि में उपज कम होता है।      उदाहरण: – कर्त्तन दहन प्रणाली
  • कर्त्तन दहन प्रणाली: – कर्त्तन दहन प्रणाली में खेत के टुकड़ा पर उगे हुए जंगली वनस्पति को काटकर और जलाकर उसमें फसल बोया जाता है। जब खेत की उर्वरता समाप्त हो जाती है तब किसान दूसरे जगह जाकर वही प्रक्रिया फिर से करते हैं। कर्त्तन दहन प्रणाली को उत्तरी पूर्वी राज्य असम, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड में झूम, मणिपुर में पामलू, छत्तीसगढ़ तथा अंडमान निकोबार में दीपा कहा जाता है।

(ii) गहन जीविका कृषि: – गहन जीविका कृषि परंपरागत कृषि कौशल के द्वारा किया जाता है भूमि की उर्वरता को बनाए रखने के लिए परंपरागत ज्ञान बीज के रखरखाव एवं मौसम संबंधी भी ज्ञान का उपयोग किया जाता है। इस कृषि में श्रम की अधिकता होती है। जहां भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक है वहां इस प्रकार की कृषि किया जाता है।

(iii) व्यापारिक कृषि: – व्यापारिक कृषि व्यापार के उद्देश्य किया जाता है। इस कृषि में अधिक पूंजी, आधुनिक कृषि तकनीकी, परिष्कृत बीज, रासायनिक खाद, सिंचाई, कीटनाशक आदि का प्रयोग किया जाता है।

  • रोपण कृषि: – बड़ी-बड़ी आर्थिक इकाइयों में व्यापारिक उत्पादन के लिए एक या एक से अधिक किस्म के पौधों के रोपण की पद्धति रोपण कृषि कहलाता है।
    • रोपण कृषि एक प्रकार का व्यापारिक कृषि है।
    • चाय, कॉफी, रबर, गन्ना, केला रोपण फसल है।
    • चाय – असम और दार्जिलिंग में, कॉफी कर्नाटक में, रबड़ केरल में उपजाया जाता है।

फसल ऋतु तीन प्रकार का होता है:- (i) खरीफ (ii) रबी (iii) जायद या गरम

कृषि खरीफ फसल

  • खरीफ फसल जून-जुलाई में वर्षा ऋतु में बोयी जाती हैं और अक्टूबर-नवंबर में जाड़े में काटी जाती हैं।
  • धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, उड़द, मूँगफली, सोयाबीन, कपास, जूट आदि खरीफ फसलें हैं।

कृषि रबी फसल :-

  • रबी फसल अक्टूबर से दिसंबर में जाड़े में बोई जाती है और अप्रैल से जून में गर्मी में काटी जाती है।
  • गेहूं, चना, जो, मटर, मसूर, सरसों आदि रबी फसलें हैं।

कृषि जायद फसल :-

  • खरीफ और रबी के बीच मार्च-अप्रैल में बोयी जाने वाली और मई-जून में काटी जाने वाली फसलें जायद फसल हैं।
  • मूँग, गर्मा धान, मकई, ककड़ी, तरबूज, खीरा, खरबूज, नेनुआ आदि जायद फसल हैं।

निम्न उत्पादकता के मुख्य कारक:- (i) जनसंख्या का कृषि भूमि पर निरंतर बढ़ता दबाव (ii) घटता कृषि भूमि क्षेत्र (iii) खेतों का छोटा आकार (iv) भूस्वामित्व प्रणाली (v) सिंचाई की कम और अनिश्चित सुविधाएँ (vi) मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता (vii) कृषि योग्य भूमि का निम्नीकरण (viii) कम पूँजी निवेश (ix) आधुनिक कृषि तकनीक (कीटनाशक, रासायनिक खाद आधुनिक यंत्र) का सीमित उपयोग (x) कृषि शोध एवम् प्रचार एवम् प्रसार तंत्रों का अच्छी स्थिति में नहीं होना (xi) कृषि उत्पादों का उचित मूल्य न मिलना (xii) सालों भर काम का अभाव। (xiii) कृषि में वाणिज्यीकरण का अभाव

चावल:-

  • चावल भारत का प्रमुख खाद्यान्न फसल है।
  • विश्व का 22% चावल क्षेत्र भारत में है।
  • भारत के कुल कृषि भूमि का 23 प्रतिशत पर चावल उगाया जाता है।
  • चावल एक उष्णकटिबंधीय फसल है।
  • चावल के लिए कम से कम 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता है।
  • चावल के लिए कम से कम 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता है।
  • चावल बोते समय 21 डिग्री बढ़ते समय 24 डिग्री तथा पके समय 27 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है।
  • चावल के लिए 150 से 200 सेंटीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • चावल जलोढ़ मिट्टी में उपजाया जाता है।
  • चावल के प्रमुख उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, असम, केरल, तमिलनाडु आदि है।
  • चावल का सबसे अधिक उत्पादन पश्चिम बंगाल में होता है।

गेहूं:-

  • गेहूं भारत का दूसरी प्रमुख खदान फसल है।
  • गेहूं के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
  • भारत में विश्व का 10% गेहूं का उत्पादन होता है।
  • गेहूं के उत्पादन के लिए 50 से 75 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • 1967 ईस्वी में हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव गेहूं के फसल पर ही पड़ा था।
  • गेहूं का उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि है।
  • गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है।

ज्वार:-

  • चावल और गेहूं के बाद सबसे प्रमुख खाद्य फसल है।
  • ज्वार भारत में 16.5% भूमि पर लगी है।
  • ज्वार से भारत का 10% खाद्यान्न उपलब्ध होता है।
  • ज्वार का उत्पादन महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में होता है।
  • ज्वार का सबसे अधिक उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है।

बाजरा:-

  • बाजरा निर्धन लोगों के लिए एवं पशुओं का प्रमुख आहार है।
  • भारत में 7% भूमि पर यह उगाया जाता है।
  • बाजरा बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है।
  • बाजरा का प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र है।
  • बाजरा का सबसे अधिक उत्पादक राज्य गुजरात है।

रागी:-

  • रागी शुष्क प्रदेश की फसल है।
  • रागी का लाल, काली, बलुआ दोमट और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है।
  • रागी का उत्पादन कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश में होता है।
  • रागी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कर्नाटक है।

मकई:-

  • मकई मनुष्य के भोजन एवं पशु के चारा के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • मकई में ग्लूकोज एवं मंड होता है।
  • भारत में 3.6% कृषिगत भूमि पर उपजाया जाता है।
  • मकई के उत्पादन के लिए 21 से 27 डिग्री तापमान तथा 75 सेंटीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • मकई का उत्पादन जलोढ़ मिट्टी में अच्छा होता है।
  • मकई के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं।
  • मकई का सबसे अधिक उत्पादक राज्य कर्नाटक है।

दाल:-

  • दाल प्रोटीन का स्रोत होता है।
  • भारत में अरहर, मूंग, मसूर, मटर और चना प्रमुख दलहनी फसल है।
  • अरहर, मूंग, उड़द दाल खरीफ की फसलें हैं।
  • चना, मटर, मसूर, रबी की फसलें हैं।
  • दाल का उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय दाल विकास कार्यक्रम 1986 – 87 में शुरू किया गया।
  • तिलहन भारत विश्व में सबसे बड़ा तिलहन उत्पादक देश है।
  • देश के कुल कृषिगत भूमि के 12% पर तिलहन का फसल उगाई जाती है।
  • मूंगफली, सरसों, नारियल तेल, सोयाबीन, अरंडी, अलसी और सूरजमुखी आदि भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख तिलहन है।

मूंगफली:-

  • यह एक खरीफ फसल है।
  • भारत विश्व में मूंगफली का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है।
  • मूंगफली देश के कुल कृषिगत भूमि का 3.6% पर उपजाया जाता है।
  • मूंगफली का उत्पादन गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में होता है।
  • मूंगफली का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य गुजरात है।

सरसों:-

  • सरसों के अंतर्गत राई, तोरिया, तारामीरा, सरसों आदि शामिल है।
  • सरसों उपोष्ण कटिबंधीय फसल है।
  • सरसों का सबसे अधिक उत्पादन राजस्थान में होता है।
  • सरसों का उत्पादक राज्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा मध्य प्रदेश है।
  • तिल खरीफ और रबी फसल दोनों है।
  • अंडी खरीफ और रबी फसल दोनों है।
  • सोयाबीन मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में उपजाया जाता है।
  • सूरजमुखी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र में उपजाया जाता है।

चाय:-

  • चाय एक सदाबहार झाड़ी होती है जिसके पत्तियां को सुखाकर चाय बनाई जाती है।
  • चाय में थीन नामक एक पदार्थ होता है। जिसे पीने से हल्की ताजगी महसूस होती है।
  • चाय के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
  • चाय के खपत में भारत का विश्व में पहला स्थान है।
  • चाय की खेती अंग्रेजों द्वारा असम के ब्रह्मपुत्र घाटी में 1840 में शुरू किया गया था।
  • चाय उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंधीय पौधा है।
  • चाय के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान आवश्यक है।
  • चाय के लिए 200 से 250 सेंटीमीटर वर्षा आवश्यक है।
  • चाय का उत्पादन असम असम की ब्रह्मपुत्र एवं सुरमा घाटी, पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग तथा जलपाईगुड़ी की पहाड़ी तथा तमिलनाडु में नीलगिरी की पहाड़ी में होता है।

कॉफी: –

  • कॉफी एक पेय पदार्थ है।
  • कॉफी एक प्रकार की झाड़ी पर लगे फल के बीज द्वारा प्राप्त किया जाता है।
  • कॉफी के फल को एकत्रित कर बीज को भून पीस कर कॉफी पाउडर बनाने में काफी मानव श्रम की आवश्यकता होती है।
  • भारत में काफी कर्नाटक, तमिलनाडु, त्रिपुरा में पाया जाता है।
  • भारत में सबसे अधिक कॉफी का उत्पादन कर्नाटक में होता है।

कॉफी की तीन किसमे होती है :- i. अरेबिका ii. लेबेरिका iii. रोबस्ता

  • भारत में उत्तम किस्म की अरेबिका काफी उपजाई जाती है।

बागवानी फसलें :- उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार आम के लिए, बिहार और उत्तर प्रदेश लीची के लिए, मेघालय अनानास के लिए, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र अंगूर के लिए, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर सेव, नाशपाती, खुबानी और अखरोट के लिए प्रसिद्ध है।

  • नागपुर एवं चेरापूंजी का संतरा, मुजफ्फरपुर का लीची और जलगांव का केला प्रसिद्ध है।
  • काजू का उत्पादन केरल एवं आंध्र प्रदेश में होता है। भारत विश्व में काजू का सबसे बड़ा उत्पादक/निर्यातक देश है।
  • काली मिर्च की खेती केरल के पश्चिमी घाट प्रदेश में होती है।
  • नारियल की कृषि केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय प्रदेश में होती है।

रबड़

  • रबड़ की कृषि 1880 में केरल के ट्रवनकोर और मालाबार में शुरू हुआ था।
  • रबड़ की उत्पादन 1902 में शुरू हुआ।
  • रबर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार और मेघालय में उपजाया जाता है।

रेशेदार फसल

  • कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम भारत का चार प्रमुख रेशेदार फसल है।
  • प्राकृतिक रेशम रेशम की कीड़ा की कोकून से प्राप्त होता है।
  • रेशम का कीड़ा शहतूत के पत्तों को खाकर बड़ा होता है।

कपास

  • कपास का जन्म स्थान भारत को माना जाता है।
  • कपास का उपयोग सूती वस्त्र उद्योग के कच्चा माल के रूप में होता है।
  • कपास उपोष्ण तथा उष्णकटिबंधीय पौधा है।
  • कपास के लिए 210 दिन तक पाल रहित

मौसम की आवश्यकता होती है।

  • कपास काली मिट्टी में उपजाया जाता है।
  • कपास का उत्पादन महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में होता है।

जूट :-

  • जूट को सुनहरा रेशा कहा जाता है।
  • जूट को तैयार होने के बाद इसे सरने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है।
  • जूट से रस्सी, चट एवं बोड़ा बनाया जाता है।

पशुधन:-

  • भारत में विश्व का सबसे अधिक पशुधन है।
  • भारत में विश्व का 57% भैंस तथा 14% गाये हैं।
  • भारत में दूध के उत्पादन में वृद्धि के लिए ऑपरेशन फ्लड या श्वेत क्रांति लाया गया।
  • सुधा दुग्ध सहकारी समिति बिहार में कार्यरत है।

कृषि में प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधार :-

  • प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार अधिनियम लाया गया।
  • 1967- 68 में हरित क्रांति का शुरूआत किया गया।
  • 1980 तथा 1990 के दशक में भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया।
  • प्राकृतिक आपदा से होने वाली क्षति से किसानों को सुरक्षित करने के लिए फसल बीमा योजना लागू की गई।
  • किसानों को कम दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण बैंक, सहकारी समिति एवं अन्य बैंक स्थापित किए गए हैं।
  • किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना योजना लागू किया गया।
  • दूरदर्शन और आकाशवाणी पर कृषि से संबंधित जानकारी को विभिन्न कार्यक्रम के माध्यम से प्रसारित किया जाता है।
  • किसानों को बिचौलियों से सुरक्षित रखने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार द्वारा घोषित किया जाता है।
  • 1980 के दशक में कृषि प्रदेश योजना की शुरुआत किया गया।

कृषि का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था रोजगार और उत्पादन में योगदान:

  • 2001 में देश का लगभग 63% जनसंख्या को कृषि से रोजगार प्राप्त था।
  • आजादी के बाद सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान घट रहा है।
  • वैश्वीकरण का भारतीय कृषि पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
  • खाद्य सुरक्षा:- भुखमरी से बचने के लिए और प्रत्येक व्यक्ति को खाद्यान्न उपलब्ध करवाने के लिए चलाया गया कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा कहलाता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :-

  1. निम्नलिखित में खरीफ फसल कौन है? उत्तर: – चावल
  2. चावल किस प्रकार की जलवायु का पौधा है? उत्तर: – उष्ण-आर्द्र
  3. चावल है- उत्तर: – खरीफ फसल
  4. दाल किस पौष्टिक अंश का स्रोत है? उत्तर: – प्रोटीन
  5. रबी की फसल किन महीनों में बोई जाती है? उत्तर: – अक्टूबर-नवम्बर
  6. निम्नलिखित में कौन व्यावसायिक फसल नहीं है? उत्तर: – गेहूं
  7. सोपानी कृषि किस राज्य में प्रचलित है? उत्तर: – उत्तराखंड
  8. ऑपरेशन फ्लड क्या है? उत्तर: – डेयरी विकास
  9. निम्न में से कौन रोपण फसल नहीं है?  उत्तर: – धान
  10. भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल कौन है? उत्तर: – धान
  11. निम्नलिखित में कौन रबी फसल है? उ                      त्तर: – गेहूं
  12. धान का एक प्रकार है                                               उत्तर: – ऑस, अमन, बोरो
  13. निम्न में से कौन खरीफ की फसल है? उत्तर: – धान
  14. निम्न में से कौन रोपण फसल का उदाहरण है?   उत्तर: – रबड़, चाय, गन्ना
  15. निम्न में से कौन दलहनी फसल वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नहीं करती है?          उत्तर: – राजमा
  16. भारत में बफर स्टॉक कौन बनाता है?      उत्तर: – भारतीय खाद्य निगम
  17. निम्न में से कौन भारत में सर्वाधिक चाय निर्यातक पत्तन है?     उत्तर: – कोलकाता
  18. ऑस प्रकार है         उत्तर: – धान का
  19. दक्षिण भारत में सर्वाधिक गन्ना उत्पादक राज्य कौन है?          उत्तर: – महाराष्ट्र
  20. भारत में लगभग 2/3 (दो तिहाई) लोगों की जीविका का आधार है-         उत्तर: – कृषि
  21. इनमें से कौन-सा यंत्र प्रारंभिक जीविका कृषि कार्य के लिए उपयोगी नहीं है?                उत्तर: – ट्रैक्टर
  22. निम्नलिखित में से किस फसल की खेती रोपण कृषि के अंतर्गत की जाती है? उत्तर: – चाय
  23. निम्न में कौन रोपण फसल नहीं है? उत्तर: – गेहूं
  24. रबी फसल की बुआई किस माह आरंभ की जाती है? उत्तर: – अक्टूबर-नवंबर
  25. जायद फसल का उत्पादन किस मौसम में होता है? उत्तर: – गर्मी
  26. निम्नलिखित में कौन रबी फसल है?                    उत्तर: – चना
  27. भारत में धान की खेती सबसे अधिक कहाँ होती है?           उत्तर: – पश्चिम बंगाल
  28. गेहूं के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?       उत्तर: – द्वितीय
  29. निम्न में से कौन मोटे अनाज की फसल नहीं है?               उत्तर: – गन्ना
  30. भारत में ज्वार की सबसे अधिक खेती कहाँ होती है?          उत्तर: – महाराष्ट्र में
  31. भारत में बाजरा की सर्वाधिक खेती कहाँ होती है?                उत्तर: – गुजरात
  32. निम्न में से कौन दलहन की फसल नहीं है?                उत्तर: – बाजरा
  33. तिलहन के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?         उत्तर: – प्रथम
  34. मूंगफली का उत्पादन भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा होता है?                                     उत्तर: – गुजरात
  35. सरसों के उत्पादन में भारत का कौन-सा राज्य प्रथम स्थान रखता है?                          उत्तर: – राजस्थान
  36. सरसों किस प्रकार की फसल है?                      उत्तर: – तेलहन
  37. चाय का सर्वप्रथम उत्पादक कहाँ आरंभ किया गया था?     उत्तर: – ब्रह्मपुत्र घाटी में
  38. चाय में किस पदार्थ की उपस्थिति के कारण ताजगी महसूस होती है?                       उत्तर: – थीन
  39. विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन है?                                                                        उत्तर: – चीन
  40. भारत में सबसे अधिक चाय का निर्यात किस पतन से किया जाता है?                                 उत्तर: – कोलकाता
  41. निम्नलिखित में कौन-सी पेय फसल है? उत्तर: – कॉफी
  42. निम्न में से कौन एक कॉफी की किस्म नहीं है?              उत्तर: – यूरेबिका
  43. निम्न में कौन-सी फसल बागवानी फसल नहीं है?             उत्तर: – कपास
  44. आम के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?           उत्तर: – प्रथम
  45. जैम, जेल, स्क्वॉश इत्यादि का कच्चा माल क्या है?          उत्तर: – फल
  46. भारत का सर्वाधिक काजू उत्पादक राज्य है।             उत्तर: – केरल
  47. भारत का ‘नारियल प्रदेश’ किसे कहा जाता है?              उत्तर: – केरल
  48. इनमें कौन-सी फसल रेशेदार है?                         उत्तर: – जूट
  49. कपास निम्न में से कौन-सी फसल है? उत्तर: – खरीफ
  50. कपास का मूल स्थान किस देश को माना जाता है?             उत्तर: – भारत
  51. कपास की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त होती है?                                  उत्तर: – काली मिट्टी
  52. कपास के उत्पादन के लिए कितने दिन पालारहित होने चाहिए?                                       उत्तर: – 210 दिन
  53. उजला सोना किस पौधे को कहा जाता है? उत्तर: – कपास
  54. सुनहरा रेशा किस फसल का अन्य नाम है?                 उत्तर: – जूट
  55. हारवेस्टर और थ्रेसर का प्रयोग किस कार्य में किया जाता है?       उत्तर: – कृषि कार्य में
  56. अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है?            उत्तर: – हैदराबाद
  57. केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान कहाँ है? उत्तर: – जोधपुर
  58. भारतीय कृषि की असफलता का एक प्रमुख कारण है-          उत्तर: – अनियमित मानसून
  59. सरकार निम्नलिखित में से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?                                                                  उत्तर: – न्यूनतम सहायता मूल्य
  60. दुग्धोत्पादन में विश्व में भारत का कौन-सा स्थान है?            उत्तर: – प्रथम

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न:-

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें :

(क) भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण अनाजों के नाम बताओ। उत्तर :- धान और गेहूं

(ख) भारत में कौन से तीन प्रमुख मोटे अनाज उगाए जाते हैं? उत्तर:- ज्वार, बाजरा और रागी

(ग) भारत की तीन नकदी फसलों के नाम बताओ उत्तर:- गन्ना, चाय और कॉफी

(घ) हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल कौन-सी है ? उत्तर:- चाय

  • अंतर बताओ :-

क) नगदी फसल और रोपण फसल उत्तर:-

  • नगदी फसल:- वैसा फसल जिसका उत्पादन बेचने के लिए किया जाता है, उसे नगदी फसल कहते हैं।
  • रोपण फसल :- वैसा फसल जिसका उत्पादन बड़े पैमाने पर बगान लगाकर व्यापार के उद्देश्य किया जाता है, उसे रोपण फसल कहते हैं।
  • निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए एक शब्द लिखो :

(क) हमारे देश में मानसून के आरंभ में बोई जाने वाली और शरद ऋतु में काटी जाने वाली फसल । उत्तर:- खरीफ फसल

(ख) वर्षा के पश्चात् जाड़े में बोई जाने वाली और वसंत में काटी जाने वाली फसलें । उत्तर:- रबी फसल

(ग) भूमि जिसे खेती करके छोड़ दिया गया है ताकि उर्वरता लौट सके और उस पर पुनः खेती हो सके । उत्तर:- चालू परती भूमि

(घ) कारखाने के उत्पादन से मिलती-जुलती वैज्ञानिक तथा व्यापारिक ढंग से की जाने वाली एक फसली खेती उत्तर:- रोपण फसल

कारण बताओ :

  1. कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः होती है। उत्तर:- कपास की खेती ढक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिक होती है क्योंकि यह अपने में अधिक समय तक नमी बनाए रखती है ।
  2. गन्ने की उपज उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है। उत्तर:- गन्ने की उपज उत्तर भारत के अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक होती है क्योंकि इसके लिए दक्षिण भारत में अधिक अनुकूल परिस्थितियाँ पाई जाती है।
  3. भारत कपास का आयात एवम् निर्यात दोनों करता है । उत्तर:- कपास के उत्पादन के लिए 210 दिन पाला रहित मौसम की आवश्यकता होती है । जिस वर्ष पाला रहित मौसम होता है उसे वर्ष भारत कपास का निर्यात करता है और जिस वर्ष पाला रहित मौसम नहीं होता है उस वर्ष भारत कपास का आयात करता है ।
  4. भारत विश्व का एक अग्रणी चाय निर्यातक देश है। उत्तर:- भारत में चाय के उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ है जिसके कारण चाय का अधिक उत्पादन होता है इसलिए भारत चाय का निर्यात करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. भारत में उपजने वाली दो खाद्य, नकदी एवं रेशेवाली फसलों का नाम लिखो । उत्तर :- (i) खाद्य फसल-धान और गेहूँ। (ii) नकदी-फसल- चाय और गन्ना (iii) रेशेवाली फसल-कपास और जूट ।
  1. उपर्युक्त फसलों के उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्यों का नाम लिखो । उत्तर :-
  2. धान:- बंगाल और बिहार
  3. गेहूँ:- उत्तर प्रदेश और पंजाब
  4. चाय:- असम और पश्चिम बंगाल
  5. गन्ना:- उत्तर प्रदेश और बिहार
  6. कपास:- महाराष्ट्र और गुजरात
  7. जूट:- पश्चिम बंगाल और बिहार
  8. भारत में उपजाए जाने वाले वर्षाधीन फसलों के नाम लिखो । उत्तर:- भारत में पाए जाने वाली वर्षा अधीन फसल चावल, गेहूं, चाय, गन्ना आदि है ।
  1. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि के योगदान की चर्चा कीजिए| या भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व हैं? उत्तर:- भारत की 63% जनसंख्या कृषि कार्य पर निर्भर है । भारत के राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है ।कृषि से भारत को 24% आय प्राप्त होता है ।
  2. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारणों को संक्षेप में लिखिए ।

उत्तर:- भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के मुख्य कारक निम्नलिखित है :- (i) जनसंख्या का कृषि भूमि पर निरंतर बढ़ता दबाव (ii) घटता कृषि भूमि क्षेत्र (iii) खेतों का छोटा आकार (v) सिंचाई की कम और अनिश्चित सुविधाएँ (vi) मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता (vii) कृषि योग्य भूमि का निम्नीकरण (xi) कृषि उत्पादों का उचित मूल्य न मिलना (xii) सालों भर काम का अभाव (xiii) कृषि में वाणिज्यीकरण का अभाव

  • हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- 1967-68 उन्नत किस्म के बीज, सिंचाई के साधन, रासायनिक खाद, कीटनाशक दवा आदि के उपयोग के कारण कृषि क्षेत्र में उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुआ, जिसे हरित क्रांति कहा जाता है। हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन को कहा जाता है। हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव गेहूं के फसल पर पड़ा। हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव पंजाब और हरियाणा राज्य पर पड़ा।

  • भारतीय कृषि की (5) पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए। [2013A, 2019AI,

उत्तर:- भारतीय कृषि की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है:-

  • भारतीय कृषि मानसून पर निर्भर है।
  • भारत के लगभग दो तिहाई लोगों की जीविका कृषि पर आधारित है।
  • भारत के राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान 24% है।
  • भारत के अधिकांश जनसंख्या को कृषि से ही भोजन प्राप्त होता है।
  • भारत में कृषि आधारित कई उद्योग है:- सूती वस्त्र उद्योग, गन्ना उद्योग, चीनी उद्योग
  • भारत में उपजाए जानेवाले प्रमुख खाद्य एवं व्यावसायिक फसलों के नाम लिखिए ।

उत्तर:- भारत की प्रमुख खाद्य फसलें – धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, अरहर, मूंग इत्यादि। भारत की प्रमुख व्यावसायिक फसलें-चाय, काफी, रबर, गन्ना, केला इत्यादि।

  • कपास के उत्पादन में महाराष्ट्र क्यों प्रसिद्ध है? [2019AII]

उत्तर:- कपास के उत्पादन के काली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती हैं | महाराष्ट्र में काली मिट्टी पाई जाती हैं इसीलिए कपास के उत्पादन के लिए महाराष्ट्र प्रसिद्ध हैं |

  1. शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों का उल्लेख कीजिए ।

उत्तर:- शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों निम्नलिखित हैं:- (i) उन्नत बीज (ii) सिंचाई

  1. रबी और खरीफ फसल में अंतर स्पष्ट करें

उत्तर:- रबी फसल:- रबी फसल को वर्षा ऋतु में जून – जुलाई में बोया जाता हैं और अक्टूबर नवम्बर में काट लिया जाता हैं |

  • खरीफ फसल:- खरीफ फसल को शीत ऋतु में अक्टूबर नवम्बर में बोया जाता हैं और मार्च अप्रैल में काट लिया जाता हैं|
  • बफर स्टॉक क्यों बनाया जाता है? [2024A]

उत्तर:- बफर स्टॉक अनाज को भंडारण के लिए बनाया जाता हैं | फूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से अनाज खरीद कर अनाज का भंडारण करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:-

  1. चावल के फसल के लिए उपयुक्त दशाओं का उल्लेख करें-

उत्तर:- चावल के फसल के लिए उपयुक्त दशाओं निम्नलिखित हैं:-

  • चावल एक उष्णकटिबंधीय फसल है।
  • चावल के लिए कम से कम 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता है।
  • चावल बोते समय 21 डिग्री बढ़ते समय 24 डिग्री तथा पटे समय 27 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है।
  • चावल के लिए 150 से 200 सेंटीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • चावल जलोढ़ मिट्टी में उपजाया जाता है।
  • गेहूँ उत्पादन हेतु मुख्य भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए भारत के गेहूं क्षेत्रों के नाम लिखें- [2011A, 2014A, 2018C]

उत्तर:- गेहूं भारत का दूसरी प्रमुख खदान फसल है गेहूं के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। भारत में विश्व का 10% गेहूं का उत्पादन होता है। गेहूं के उत्पादन के लिए 50 से 75 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। 1967 ईस्वी में हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव गेहूं के फसल पर ही पड़ा था। गेहूं का उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि है। गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है।

  • चाय उत्पादन के भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें | भारत में चाय उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख करें- [2015AI, 2017AII]

उत्तर:- चाय एक सदाबहार झाड़ी होती है जिनके पत्तियां को सुखाकर चाय बनाई जाती है। चाय उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंधीय पौधा है। चाय के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान आवश्यक है। चाय के लिए 200 से 250 सेंटीमीटर वर्षा आवश्यक है

  • चाय की खेती अंग्रेजों द्वारा असम के ब्रह्मपुत्र घाटी में 1840 में शुरू किया गया था। चाय का उत्पादन असम असम की ब्रह्मपुत्र एवं सुरमा घाटी, पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग तथा जलपाईगुड़ी की पहाड़ी तथा तमिलनाडु में नीलगिरी की पहाड़ी में होता है।
  • भुखमरी की समस्या के निवारण के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई खाद्य सुरक्षा प्रणाली का विवेचना करें | [2022AI]

उत्तर:- भुखमरी से बचने के लिए और प्रत्येक व्यक्ति को खाद्यान्न उपलब्ध करवाने के लिए चलाया गया कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा कहलाता है।

खाद्य सुरक्षा के दो अंग है :- (i) बफर स्टॉक (ii) जन वितरण प्रणाली

  • खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत सस्ती दरों पर आवश्यक सामग्री एवम् अनाज शहरों एवम् ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को मुहैया कराई जाती है। इससे गरीब लोगों को भोजन सुलभ हो गया है। बफर स्टॉक बनाने में (FCI) फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया सक्रिय है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर यह किसानों से अनाज खरीद कर उसका भंडारण करती है।

उपभोक्ता दो वर्ग में बांटा गया है :- (i) एपीएल:- गरीबी रेखा के ऊपर के लोगों को APL के श्रेणी में रखा जाता हैं | (ii) बीपीएल:- गरीबी रेखा के नीचे के लोगों को APL के श्रेणी में रखा जाता हैं |

  • भारतीय कृषि पर भूमंडलीकरण के प्रभाव पर एक टिप्पणी लिखें-

उत्तर:- भूमंडलीकरण का भारतीय कृषि पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है। भूमंडलीकरण का अर्थ है देश की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ना। इसने भारतीय बाजार को विश्व के बाजार के लिये खोल दिया है। अब विदेशी उत्पाद जिसमें कृषिजन्य उत्पाद भी शामिल हैं, आसानी से भारत में बेचे जा सकते हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से भारतीय किसान को एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय कृषि कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रही है। इसकी सबसे बड़ी समस्या

फ़सलों का प्रति एकड़ कम उत्पादन है। भारत में भूमि की प्रति इकाई में फ़सलों का उत्पादन जापान का $1/3$ और संयुक्तराज्य अमेरिका का $1/4$ है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए भारत को अपनी कृषि संबंधित क्षमताओं को सुनियोजित ढंग से उपयोग करना होगा। जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग के अलावा राष्ट्रीय बाजार का एकीकरण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके लिए सड़क, बिजली, सिंचाई, ऋण की सुविधा आदि उपलब्ध करना परम आवश्यक है। इसके बिना कृषि को वैश्वीकरण के अनुचित प्रभाव से बचा पाना संभव नहीं है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top