भारत: संसाधन एवं उपभोग Geography Chapter 01 Class 10th Metric Exam 2027 VVI Objective Question

भारत: संसाधन एवं उपभोग

1. भारत: संसाधन एवं उपभोग

भारत संसाधन एवं उपभोग Geography Chapter 01 Class 10th
भारत संसाधन एवं उपभोग
  • संसाधन:-मानव जीवन में उपयोग में आने वाली सभी वस्तुएँ संसाधन कहलाती हैं।

जैसे— जल, पेड़-पौधा।

  • संसाधन भौतिक या जैविक दोनों हो सकते हैं।

भौतिक संसाधन — भूमि, मृदा, जल, खनिज।

जैविक संसाधन — वनस्पति, जलीय जीव।

नोट— भौतिक और जैविक दोनों पदार्थ तकनीक के सहारे ही जीवनोपयोगी हो पाते हैं।

जिम्मरमैन ने कहा— “संसाधन होते नहीं, बनते हैं।”

सेवा को भी संसाधन माना गया है।

संसाधन किसी भी देश का आर्थिक-सामाजिक मेरुदंड होता है।

  • उत्पत्ति के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं

(A) जैव संसाधन

(B) अजैव संसाधन

  • जैव संसाधन — सजीव वस्तुओं के समूह को जैव संसाधन कहा जाता है।
  • अजैव संसाधन — निर्जीव वस्तुओं के समूह को अजैव संसाधन कहा जाता है।
  • उपयोगिता के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं

(A) नवीकरणीय संसाधन

(B) अनवीकरणीय संसाधन

1.1 नवीकरणीय संसाधन:-वैसे संसाधन जिन्हें पुनः प्राप्त किया जा सकता है, उन्हें नवीकरणीय संसाधन कहा जाता है।

जैसे— सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, वन एवं वन्य प्राणी।

  • नवीकरणीय संसाधन दो प्रकार के होते हैं—

सतत/प्रवाह संसाधन — जैसे जल, पवन।

जैव संसाधन — जैसे वन और वन्यजीव।

2.1 अनवीकरणीय संसाधन:- वैसे संसाधन जिन्हें पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है, उन्हें अनवीकरणीय संसाधन कहा जाता है।

  • अनवीकरणीय संसाधन दो प्रकार के होते हैं—

पुनः चक्रीय — जैसे धातु।

अचक्रिय — जैसे जीवाश्म ईंधन।

  • स्वामित्व के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं

A व्यक्तिगत संसाधन

B सामुदायिक संसाधन

C राष्ट्रीय संसाधन

D अंतरराष्ट्रीय संसाधन

1.2 व्यक्तिगत संसाधन:- वैसे संसाधन जिस पर किसी व्यक्ति का अधिकार होता है, उसे व्यक्तिगत संसाधन कहा जाता है।

जैसे— भूखंड, घर व अन्य।

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2. सामुदायिक संसाधन:- वैसे संसाधन जिस पर किसी खास समुदाय का अधिकार होता है, उसे सामुदायिक संसाधन कहा जाता है।

जैसे— चरागाह भूमि, मंदिर, मस्जिद, तालाब, समुदाय भवन, गुरुद्वारा, गिरजाघर।

3. राष्ट्रीय संसाधन:-वैसे संसाधन जिस पर किसी राष्ट्र का अधिकार होता है, उसे राष्ट्रीय संसाधन कहा जाता है।

किसी देश के अंतर्गत उपलब्ध सभी संसाधनों को राष्ट्रीय संसाधन कहा जाता है।

4. अंतरराष्ट्रीय संसाधन:- वैसे संसाधन जिस पर अंतरराष्ट्रीय संस्था का नियंत्रण होता है, उसे अंतरराष्ट्रीय संसाधन कहते हैं।

किसी देश की तटरेखा से 200 किलोमीटर की दूरी तक का क्षेत्र अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र कहलाता है।

  • विकास के स्तर के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं

A संभावी संसाधन   B विकसित संसाधन

C भंडारण संसाधन   D संचित कोष संसाधन

1. संभावी संसाधन:- वैसे संसाधन जिसे भविष्य में उपयोग में लाये जाने की संभावना है, उसे संभावी संसाधन कहा जाता है।

जैसे— हिमालय की क्षेत्र का खनिज, पवन और सौर ऊर्जा।

2. विकसित संसाधन:- वैसे संसाधन जिन्हें उपलब्ध तकनीक के आधार पर उपयोग में लाया जा सकता है, उसे विकसित संसाधन कहा जाता है।

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3. भंडार संसाधन:- वैसे संसाधन जिसे उपयुक्त तकनीक के अभाव में वर्तमान में उपयोग में नहीं लाया जा सकता है, उसे भंडार संसाधन कहा जाता है।

4. संचित कोष संसाधन:-वैसे संसाधन जिसे उपलब्ध तकनीक के आधार पर प्रयोग में लाया जा सकता है, उसे संचित कोष संसाधन कहा जाता है।

संसाधन नियोजन:- संसाधन का विवेकपूर्ण उपयोग करना संसाधन नियोजन कहलाता है।

संसाधन संरक्षण:- संसाधन का नियोजन एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना संसाधन संरक्षण कहलाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

महात्मा गाँधी का कहना था— “हमारे पास पेट भरने के लिए बहुत कुछ है लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं।”

मेधा पाटकर का संबंध नर्मदा बचाओ आंदोलन से है।

सुन्दरलाल बहुगुणा का संबंध चिपको आंदोलन से है।

संदीप पांडे का संबंध वर्षा जल संचयन एवं कृषि भूमि विस्तार से है। 1968 ई. में क्लब ऑफ रोम संसाधन संरक्षण की वकालत की थी।

Small is Beautiful पुस्तक के लेखक sumsher हैं।

Small is Beautiful पुस्तक में संसाधन संरक्षण से संबंधित गाँधीजी के विचार प्रकाशित हैं।

हमारा साझा भविष्य रिपोर्ट में सतत विकास और संसाधन संरक्षण पर बल दिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण हेतु सर्वप्रथम स्टॉकहोम में विश्व शिखर सम्मेलन 1972 ई. में आयोजित हुआ था।

पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है।

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डाकुओं की अर्थव्यवस्था:- मानव एवं तकनीक की शोषणात्मक दोहन प्रवृत्ति को डाकुओं की अर्थव्यवस्था कहा जाता है।

सतत विकास:- पर्यावरण को बिना क्षति पहुँचाए, भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान विकास को कायम रखा जा सकता है। ऐसी धारणा को सतत विकास कहा जाता है।

स्मरणीय तथ्य

प्रथम पृथ्वी सम्मेलन 1992 में रियो-डी-जेनेरो में हुआ था।

द्वितीय पृथ्वी सम्मेलन 1997 में न्यूयॉर्क में हुआ था। इसे प्लस 5 सम्मेलन भी कहा जाता है।

तृतीय पृथ्वी सम्मेलन 2002 में जोहासबर्ग में हुआ था।

1992 के रियो-डी-जेनेरो सम्मेलन में कार्यक्रम 21 (एजेंडा-21) को स्वीकार किया गया।

1997 में जापान के क्योटो में पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए क्योटो सम्मेलन का आयोजन हुआ।

क्योटो सम्मेलन को विश्व पर्यावरण सम्मेलन या ग्रीन हाउस सम्मेलन भी कहा जाता है।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. कोयला किस प्रकार का संसाधन है?

उत्तर— अनवीकरणीय

2. सौर ऊर्जा निम्नलिखित में से कौन-सा संसाधन है?

उत्तर— पुनः पूर्तियोग्य

3. तट रेखा से कितने कि.मी. क्षेत्र सीमा अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र कहलाते हैं?

उत्तर— 200 कि.मी.

4. डाकुओं की अर्थव्यवस्था का संबंध है—

उत्तर— संसाधनों के अनियोजित विदोहन

5. समुद्री क्षेत्र में राजनीतिक सीमा के कितने कि.मी. क्षेत्र तक राष्ट्रीय संपदा निहित है?

उत्तर— 19.2 कि.मी.

6. पर्यावरण संरक्षण हेतु पहला विश्व शिखर सम्मेलन कब आयोजित हुआ?

उत्तर— 1972 ई.

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7. निम्न में से कौन अजैविक संसाधन है ?

उत्तर :- नदी

8. निम्न में से कौन नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत है ?

उत्तर :- सौर ऊर्जा

9. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए 1968 में कौन – सा कन्वेशन हुआ था ?

उत्तर :- अफ्रीकी कन्वेशन

10. द्वितीय पृथ्वी सम्मेलन कहाँ हुआ था ?

उत्तर :- न्यूयार्क

11. सौर ऊर्जा निम्नलिखित में से कौन – सा संसाधन है ?

उत्तर :- नवीकरणीय

12. सौर ऊर्जा निम्नलिखित में से कौन – सा संसाधन है ?

उत्तर :- पुनःपूर्तियोग्य

भारत:

13. विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है ?

उत्तर :- 5 जून को

14. प्रथम पृथ्वी सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ ?

उत्तर :- रियो डी जनेरियो

15. निम्न में कौन अनवीकरणीय संसाधन है ?

उत्तर :- जीवाश्म ईंधन

भारत: संसाधन एवं उपभोग लघु उत्तरीय प्रश्न :-

1. संसाधन को परिभाषित कीजिए | [2015A, 2019AII]

उत्तर :- मानव जीवन के उपयोग में आनेवाली सारी वस्तुएं संसाधन कहलाती है |

जैसे :- नल, बोर्ड, मोबाइल, साईकिल ETC.

2. संभावी एवं संचित कोष संसाधन में अंतर स्पष्ट कीजिए |

उत्तर :- संभावी संसाधन- वैसा संसाधन जिसे भविष्य में उपयोग में लाये जाने की संभावना है उसे संभावी संसाधन कहा जाता है |

संचित कोष संसाधन- वैसे संसाधन जिसे उपलब्ध तकनीक आधार पर उपयोग में लाया में लाया जा सकता है उसे संचित को संसाधन कहते है |

3. संसाधन संरक्षण की उपयोगिता को लिखिए | [2024AI]

उत्तर :- सभ्यता और संस्कृति के विकास में संसाधनों की अहम भूमिका होती है | किन्तु संसाधनों का अविवेकीपूर्ण या अतिशय उपयोग विविध प्रकार की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय समस्याओ को जन्म देता है | इन समस्याओ की समाधान हेतु संसाधन संरक्षण की आवश्यकता होती है |

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4. संसाधन निर्माण में तकनीक की क्या भूमिका है, स्पष्ट कीजिए

उत्तर :- संसाधन निर्माण में तकनीक का भूमिका महत्वपूर्ण होती है | पर्यावरण में उपलब्ध पदार्थ तकनीक की सहारे जीवनोपयोगी बनाया जाता हैं |

5. क्योटो सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था? [2023AII]

उत्तर :- क्योटो सम्मेलन 1997 ईस्वी में जापान के क्योटो शहर में आयोजित किया गया । इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेवार ग्रीन हाउस गैस के उपयोग में कटौती करना था ।

6. प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण क्यों आवश्यक है? [2017AII, 2019AII]

उत्तर :- संसाधन के अत्यधिक प्रयोग से विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती है । संसाधन का नियोजित एवं विवेकपूर्ण उपयोग संसाधन संरक्षण कहलाता है । सतत विकास को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण आवश्यक है ।

7. संसाधन संरक्षण का क्या महत्व है? [2022AII]

उत्तर :- संसाधन के संरक्षण कर पर्यावरण को बिना क्षति पहुंचाएं, भविष्य की आवश्यकताओं मद्देनजर, वर्तमान विकास को कायम रखा जा सकता है । इससे वर्तमान विकास के साथ-साथ भविष्य भी सुरक्षित रह सकता है ।

भारत: संसाधन एवं उपभोग दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :-

1. संसाधन के विकास में सतत विकास की अवधारणा की व्याख्या कीजिए |

उत्तर :- संसाधन मनुष्य की जीविका का आधार है | जीवन की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए संसाधनों की सतत विकास की अवधारणा आवश्यक है | ‘संसाधन प्रकृति प्रदत्त उपहार है’ की अवधारणा के कारण मानव ने इनका अंधा धुंध दोहन किया, जिसके कारण पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न हो गई |

संपन्न लोगों द्वारा स्वार्थ के वशीभूत होकर संसाधनों का विवेकहीन दोहन किया गया | जिससे विश्व पारिस्थितिकी में घोर संकट की स्थिति हो गई हैं | भूमंडलीय तापन, ओजोन क्षय, पर्यावरण, प्रदूषण, मृदा क्षरण, भूमि विस्थापन, अम्लीय वर्षा, असमय ऋतु परिवर्तन जैसी पारिस्थितिकी संकट पृथ्वी पर व्याप्त सभ्यता संस्कृति को निगल जाने को तैयार है | अगर इन स्वार्थी तत्वों द्वारा अनवरत विदोहन चलता रहा तो पृथ्वी का जैव संस्करण विनाश के आगोश में समा जायेगा |

अतः वर्तमान के साथ भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सतत विकास की आवश्यकता है | पर्यावरण को बिना क्षति पहुंचाएं, भविष्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर, वर्तमान विकास को कायम रखा जा सकता है | ऐसी धारणा को ही सतत विकास कही जाती हैं |

3. स्वामित्व के आधार पर संसाधन के विविध स्वरूपों का वर्णन कीजिए |

उत्तर :- स्वामित्व के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं:-

(a) व्यक्तिगत संसाधन

(b) सामुदायिक संसाधन

(c) राष्ट्रीय संसाधन

(d) अंतर्राष्ट्रीय संसाधन

  • व्यक्तिगत संसाधन :- वैसा संसाधन जिस पर किसी खास व्यक्ति का अधिकार होता हैं | उसे व्यक्तिगत संसाधन कहा जाता हैं |
  • सामुदायिक संसाधन :- वैसा संसाधन जिसपर किसी खास समुदाय का अधिकार होता है उसे सामुदायिक संसाधन कहा जाता हैं |
  • राष्ट्रीय संसाधन :- वैसा संसाधन जिसपर किसी राष्ट्र का अधिकार होता है उसे राष्ट्रीय संसाधन कहा जाता हैं |
  • अंतरराष्ट्रीय संसाधन :- वैसा संसाधन जिसपर अंतर्राष्ट्रीय संस्था का अधिकार होता है उसे अंतरराष्ट्रीय संसाधन कहा जाता हैं |

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